एमपी धमाका
सिरोंज (विदिशा)। भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की प्रेरक मिसाल विदिशा जिले के सिरोंज स्थित गणपति ज्योतिष निकेतन में देखने को मिलती है। यहां पं. श्री नलिनीकान्त शर्मा के संरक्षण में लगभग 300 पारिवारिक पाण्डुलिपियों का दुर्लभ संग्रह सुरक्षित है, जो भारतीय साहित्य, धर्म, ज्योतिष और गणित की समृद्ध परंपरा को दर्शाता है।
इस संग्रह में श्रीमद्भागवत की दो प्रतियां, वाल्मीकि रामायण, महाभारत तथा ज्योतिष, कर्मकाण्ड, जैन पूजा-पद्धति और गणित से संबंधित पाण्डुलिपियां शामिल हैं। इनमें अनेक ग्रंथ लगभग 150 से 175 वर्ष पूर्व पं. श्री गणपतराम शर्मा द्वारा हस्तलिखित किए गए थे। लेखन के प्रति उनके विशेष अनुराग के कारण वे ‘लिखाड़ीलाल’ के नाम से प्रसिद्ध थे। संग्रह में ऐसी पाण्डुलिपियां भी हैं, जो उनके समय से लगभग 200 से 250 वर्ष पूर्व की बताई जाती हैं।
शर्मा परिवार की कई पीढ़ियों ने इन दुर्लभ ग्रंथों के लेखन, पुनर्लेखन और संरक्षण की परंपरा को आगे बढ़ाया है। यह संग्रह उस दौर की हस्तलेखन कला और ज्ञान को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने की परंपरा का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है।
सिरोंज का यह संग्रह न केवल क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करता है, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान-संपदा के संरक्षण में पारिवारिक परंपराओं की भूमिका को भी रेखांकित करता है। ऐसी धरोहरों का दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण भावी पीढ़ियों तक इस अमूल्य विरासत को पहुंचाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम होगा।