कम वेतन वाले कर्मचारी निभा रहे जिम्मेदारी, महंगे चिकित्सकों की ड्यूटी पर उठे सवाल
एमपी धमाका
विदिशा। आयुष विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। महज 4 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाला योग प्रशिक्षक प्रतिदिन ड्यूटी पर पहुंचकर अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है, वहीं दावा है कि प्रतिदिन 5 हजार रुपये तक वेतन पाने वाले और डेढ़ लाख रुपये मासिक वेतन वाले कुछ चिकित्सक कभी-कभार ही आयुष औषधालयों में ड्यूटी पर आते हैं।
यह व्यवस्था की गंभीर विसंगति है। एक ओर कम वेतन में भी कर्मचारी नियमित सेवाएं दे रहा है, वहीं दूसरी ओर भारी वेतन पाने वाले चिकित्सकों की कथित अनियमित उपस्थिति मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही है।
सवाल यह है कि जिम्मेदार अधिकारी आखिर कब जागेंगे? क्या चिकित्सकों की उपस्थिति का नियमित सत्यापन किया जाता है? क्या ड्यूटी से अनुपस्थित रहने वालों पर कार्रवाई होती है? और यदि सब कुछ नियमानुसार चल रहा है, तो उनकी उपस्थिति का रिकॉर्ड क्या कहता है?
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग निष्पक्ष जांच कराए, सार्थक एप उपस्थिति रजिस्टर और ड्यूटी रिकॉर्ड की पड़ताल करे तथा आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे।
कम वेतन वाले कर्मचारी की नियमितता और भारी वेतन वाले चिकित्सकों की कथित अनियमितता-इस अंतर का जवाब जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।