आयुष अधिकारी पर फर्जी वैद्य को संरक्षण के आरोप! एनएचआरसी के हस्तक्षेप के बाद भी जांच रिपोर्ट लंबित
विदिशा में कथित अवैध चिकित्सा कारोबार का मामला गरमाया, कलेक्टर ने सीएमएचओ को जारी किया स्मरण पत्र, पांच दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
एमपी धमाका
विदिशा। जिले में कथित अवैध चिकित्सा कारोबार और एक युवक की मौत से जुड़े मामले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिना वैधानिक पंजीकरण के क्लिनिक संचालित करने, अवैध चिकित्सक को संरक्षण देने और शिकायतों पर जिला आयुष अधिकारी द्वारा उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोपों को लेकर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक मामला पहुंच चुका है। इसके बावजूद जांच प्रतिवेदन लंबित होने पर जिला प्रशासन ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है।
कार्यालय कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट विदिशा की ओर से 24 सितंबर 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) को जारी स्मरण पत्र में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रकरण क्रमांक 1037/12/49/2026 का उल्लेख करते हुए तत्काल कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अवैध क्लिनिक और मेडिकल स्टोर को संरक्षण देने के आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विदिशा में एक कथित अवैध चिकित्सक शेरसिंह पहाड़ी और सुंदरलाल जैन मेडिकल स्टोर के संचालकों को आयुष विभाग द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित व्यक्ति के पास वैधानिक चिकित्सकीय पंजीकरण नहीं होने के बावजूद क्लिनिक संचालित किया जा रहा था।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मध्यप्रदेश आयुर्वेद बोर्ड में पंजीकृत चिकित्सक नहीं होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को संरक्षण मिला। इसके साथ ही कथित चिकित्सा लापरवाही और एक युवक की मौत का मामला भी उठाया गया है।
युवक की मौत के मामले में कार्रवाई पर सवाल
शिकायत में 26 दिसंबर 2024 को जारी एक प्रशासनिक आदेश का हवाला देते हुए आरोप लगाया गया है कि गंभीर शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के बावजूद संबंधित व्यक्ति को राहत दी गई। शिकायतकर्ता ने इस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है।
पांच दिन में मांगी गई जांच रिपोर्ट
कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी स्मरण पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि शिकायत के संबंध में जांच प्रतिवेदन पांच दिवस में उपलब्ध कराया जाना था, लेकिन निर्धारित समय तक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई। ऐसे में अब तत्काल जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज प्रकरण और जिला प्रशासन के बार-बार पत्राचार के बावजूद जांच रिपोर्ट लंबित रहने से स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कथित अवैध क्लिनिक के संचालन, युवती की मौत और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कब पूरी होगी? क्या शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होगी और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रकरण में कार्रवाई प्रतिवेदन मांगे जाने और कलेक्टर कार्यालय के ताजा स्मरण पत्र के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। पीड़ित परिवार को न्याय और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन को समयबद्ध कदम उठाने होंगे।