15 दिन बाद मिला आदेश, नियमों को ताक पर रख रहे अधिकारी
विदिशा, एमपी धमाका
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी नहीं मिलने पर प्रथम अपील करना भी आवेदक के लिए लंबी प्रक्रिया बन गया। जिला पंचायत विदिशा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं प्रथम अपीलीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत प्रथम अपील में बार-बार तारीखें निर्धारित की गईं। इसके बाद 19 अक्टूबर 2026 को अपील निरस्त करने का आदेश पारित कर दिया गया।
अपीलार्थी का आरोप है कि प्रथम अपील की सुनवाई में बार-बार तारीखें दी गईं, जबकि सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत अपील के निराकरण को तारीख पर तारीख लगाने वाली प्रक्रिया नहीं बनाया जाना चाहिए। 30 दिन में अपील का निराकरण होना चाहिए।
उनका कहना है कि अंततः ऐसा फैसला सुनाया गया, जिसमें मूल विषय-वस्तु और मांगी गई जानकारी के संबंध में ठोस विवेचना दिखाई नहीं देती।
आदेश में क्या लिखा है?
19 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में प्रथम अपील प्रकरण क्रमांक 55/2026 को निरस्त किया गया है। आदेश के अनुसार मूल सूचना के लिए आवेदन 28 जुलाई 2026 को दिया गया था। सुनवाई के लिए 28 सितंबर, 12 अक्टूबर और 19 अक्टूबर 2026 की तारीखों का उल्लेख किया गया है।
आदेश में लोक सूचना अधिकारी के लिखित कथन के आधार पर बताया गया कि अपीलार्थी द्वारा चाही गई जानकारी कार्यालय में संधारित नहीं है। इसी आधार पर प्रथम अपील निरस्त कर दी गई।
फैसले में मूल विषय-वस्तु कहां?
अपीलार्थी का सवाल है कि जब पूरा विवाद मांगी गई जानकारी और उसके उपलब्ध होने अथवा नहीं होने से जुड़ा था, तो आदेश में इस विषय की विस्तृत विवेचना क्यों नहीं की गई? क्या केवल लोक सूचना अधिकारी के इस कथन के आधार पर कि जानकारी कार्यालय में संधारित नहीं है, अपील निरस्त करना पर्याप्त था? क्या संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी उसके कारणों की पड़ताल नहीं होनी चाहिए थी?
उनका यह भी कहना है कि आदेश 19 अक्टूबर को पारित किया गया, लेकिन उसकी प्रति लगभग 15 दिन बाद प्राप्त हुई। आदेश में द्वितीय अपील के अधिकार और आगे की अपील प्रक्रिया का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
आरटीआई कानून में क्या है प्रावधान?
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(6) के अनुसार प्रथम अपील का निराकरण 30 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में लिखित कारण दर्ज करते हुए अधिकतम 45 दिनों में निर्णय दिया जा सकता है।
वहीं धारा 19(3) के तहत प्रथम अपील के निर्णय के विरुद्ध संबंधित राज्य सूचना आयोग में 90 दिनों के भीतर द्वितीय अपील प्रस्तुत करने का प्रावधान है।
अब द्वितीय अपील में उठेंगे सवाल
अपीलार्थी का कहना है कि वह इस आदेश को उच्च स्तर पर चुनौती देने और मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामला केवल व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार के तहत सरकारी कार्यालयों की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने से भी जुड़ा है।
अब देखना होगा कि द्वितीय अपील में इस आदेश और पूरी प्रक्रिया पर क्या स्थिति सामने आती है।
एमपी धमाका की पड़ताल
सूचना का अधिकार तभी सार्थक होगा, जब आवेदक को समय पर जानकारी मिले और अपील का निराकरण भी कानून की भावना के अनुरूप हो। तारीखों के लंबे सिलसिले और आदेश की विषय-वस्तु को लेकर उठे सवालों का जवाब अब द्वितीय अपील की प्रक्रिया में सामने आ सकता है।