कलेक्टर अंशुल गुप्ता की पहल से जिले में 49 ईंट भट्ठों पर बच्चों का पंजीयन, पोषण और शिक्षा से जुड़ने लगे प्रवासी परिवार
विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा जिले में ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर परिवारों के बच्चों को आंगनवाड़ी सेवाओं से जोड़ने के लिए चलाया गया अभियान अब एक सफलता की कहानी बन गया है। आमतौर पर ईंट भट्ठों पर काम करने वाले परिवारों का लगातार स्थान परिवर्तन होता रहता है, जिसके कारण उनके बच्चे आंगनवाड़ी सेवाओं से वंचित रह जाते थे। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर श्री गुप्ता के निर्देशन में विशेष पहल की गई।
कलेक्टर श्री गुप्ता ने महिला एवं बाल विकास विभाग, परियोजना अधिकारियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजरों की टीम को ईंट भट्ठों पर जाकर वहां रहने वाले परिवारों और बच्चों की पहचान करने के निर्देश दिए। टीम द्वारा लगातार ईंट भट्ठों का भ्रमण कर बच्चों का पंजीयन किया गया और गर्भवती व धात्री महिलाओं को भी विभिन्न योजनाओं से जोड़ा गया।
विकासखण्ड स्तर पर किए गए सर्वे के अनुसार जिले में कुल 49 ईंट भट्ठों पर पहुंचकर आंगनवाड़ी सेवाओं से परिवारों को जोड़ा गया। इनमें विदिशा विकासखण्ड में 2, गंजबासौदा में 35, सिरोंज में 10 और लटेरी में 2 ईंट भट्ठों पर कार्य किया गया।
इस अभियान का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि जो परिवार पहले आंगनवाड़ी सेवाओं से दूर थे, अब वे इन सेवाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। माता-पिता भी अब बच्चों के पोषण, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
इसी क्रम में विदिशा जिले के सुनपुरा गांव स्थित ईंट भट्ठे पर कार्यरत तीन बच्चों की पहचान की गई, जिनका पहले आंगनवाड़ी केन्द्र में पंजीयन नहीं हुआ था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा इन बच्चों का पंजीयन कर उनके पोषण और स्वास्थ्य संबंधी सेवाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
कलेक्टर श्री गुप्ता का कहना है कि प्रशासन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इस तरह के प्रयासों से समाज के वंचित वर्गों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सकता है। यह पहल न केवल बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि जिले के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी बन गई है।