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राष्ट्रीय मंच पर चमका विदिशा - गौमय उत्पादों को SKOCH अवॉर्ड, 2150 महिलाओं की मेहनत को मिला सम्मान


 गौशालाओं से आत्मनिर्भरता की राह - पर्यावरण संरक्षणमहिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अनूठा संगम

कलेक्टर को सौंपा SKOCH अवॉर्ड सम्मान

विदिशा, एमपी धमाका 

विदिशा जिले के लिए यह गर्व का क्षण है कि जिले में निर्मित गौमय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। नई दिल्ली में आयोजित SKOCH Summit 2026 के दौरान विदिशा की गौशालाओं से जुड़े उत्पादकों को प्रतिष्ठित SKOCH Awards से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गौरव का विषय हैबल्कि ग्रामीण नवाचार और स्वावलंबन का सशक्त उदाहरण भी बनकर सामने आई है।

कलेक्टर अंशुल गुप्ता को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विदिशा जिले को प्राप्त अवार्ड सम्मान प्रमाण पत्र को सौंपा गया है। गौरतलब हो कि कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत सीईओ ओपी सनोडिया और पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक डाॅ एनके शुक्ला ने दिल्ली मेें उक्त अवार्ड प्रमाण पत्र को प्राप्त किया था। जिसे आज कलेक्टर चेम्बर में उल्लेखित अधिकारियों के द्वारा सौंपा गया है।

कलेक्टर श्री गुप्ता की प्रेरणादायक मार्गदर्शन में दीपावली 2025 से पहले एक व्यापक अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत विदिशा जिले की 45 गौशालाओं एवं आजीविका मिशन से जुड़ी 182 महिला स्व-सहायता समूहों की लगभग 2150 महिलाओं को गौमय उत्पाद निर्माण से जोड़ा गया है।

इस पहल के तहत महिलाओं ने गोबर से बने करीब 250 प्रकार के पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किएजिनमें दीपकहवन कपधूपबत्तीमूर्तियां और सजावटी सामग्री प्रमुख हैं।

उत्पादन को गति देने के लिए 108 हस्तचालित मशीनें और बड़ी संख्या में सांचे उपलब्ध कराए गएजिससे बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किए जा सके।

परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख गौमय दीपकों का निर्माण किया गयाजिन्हें देश के विभिन्न शहरों में भेजकर बिक्री की गई। इस पूरी प्रक्रिया से उत्पादकों को करीब 12.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुईजिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

 विशेष पहलू

पर्यावरण संरक्षण

प्लास्टिक और रासायनिक उत्पादों के स्थान पर प्राकृतिक एवं जैविक गौमय उत्पादों का उपयोग बढ़ा।

महिला सशक्तिकरण

2150 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का स्थायी स्रोत मिला।

गौशालाओं की आत्मनिर्भरता

गौशालाओं को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त हुएजिससे उनका संचालन सुदृढ़ हुआ।

स्थानीय से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच

विदिशा के उत्पाद देशभर में पहुंचेजिससे ब्रांड पहचान बनी।

सस्टेनेबल मॉडल

यह पहल पशुपालनआजीविका और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए एक टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मॉडल प्रस्तुत करती है।

 प्रभाव और भविष्य की दिशा

इस अभिनव मॉडल की सफलता के बाद इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। भविष्य में अधिक गौशालाओं और स्व-सहायता समूहों को जोड़कर उत्पादन बढ़ाने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया जाएगा।

कलेक्टर के नवाचारों का यह प्रयास दिखाता है कि स्थानीय संसाधनों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किस तरह आत्मनिर्भरतापर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।

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