प्रशासन की मिलीभगत से बन रहीं अवैध कालोनियां
विदिशा, एमपी धमाका
अवैध कॉलोनियों को प्रशासन वाकई रोकना चाहता है तो फिर आपत्तियों को दरकिनार कर डायवर्सन आदेश कैसे हो जाते हैं? यह सबसे बड़ा सवाल है और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। प्रशासन की उदासीनता से शहर की अवैध कालोनियों में खरीद फरोख्त का काम खुलेआम चल रहा है। इन कॉलोनी में सुविधाओं के नाम पर लोगों को छला जाता है और प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधकर देखता रहता है।
एसडीएम कार्यालय से डायवर्सन के समय नगर एवं ग्राम निवेश की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया जाता है। सबसे बड़ा सवाल है प्रशासन यदि अवैध कालोनियों के मामले को लेकर वाकई गंभीर है तो फिर आपत्ति के बावजूद डायवर्सन आदेश कैसे हो जाते हैं?
जनता को हमेशा उम्मीद रहती है कि जिला प्रशासन अवैध कालोनियों पर रोक लगा देगा, लेकिन प्रशासन आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में पूरी तरह विफल रहा है और एक तरह से अवैध कालोनियों का मददगार बनकर उभरा है। यदि ऐसा नहीं है तो फिर अवैध कालोनियों को खुली छूट क्यों दी गई? करोड़ों की अवैध कमाई करने वाले कुछ हजार का जुर्माना भरकर खुलेआम आज भी प्लाट कैसे काट रहे हैं और प्रशासन चुप है।
जिले में अवैध कालोनियों का गोरख धंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार के निर्देश पर माफिया के विरुद्ध चली मुहिम भी इस गोरखधंधे को रोक नहीं सकी और प्लाटों की खरीद-फरोख्त का काम आज भी बदस्तूर जारी है।
अवैध कालोनियों का काम ऐसा है कि जिसमें रातों-रात आदमी रोडपति से करोड़पति बन जाता है और सभी के बारे के न्यारे हो जाते हैं। इसलिए इस अवैध काम को आज तक कोई रोक नहीं पाया। शहर के चाहे नेता हों या रोड छाप कार्यकर्ता, समाजसेवी हों या डॉक्टर, उद्योगपति हों या व्यापारी, रसूखदार हों या कर्मचारी, महाजन हों या असामाजिक तत्व सभी मिलकर अवैध कॉलोनी की गंगा में डुबकी लगाकर अपने आप को धन्य कर गरीबों की पसीने की कमाई को लूट रहे रहे हैं और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे हैं। प्रशासन कभी कभार कार्रवाई के नाम पर नोटिस देकर अपनी पीठ थपथपा लेता है। लेकिन इन कालोनियों पर रोक आज तक नहीं लग सकी है।
वजह साफ है चंद पैसे लगाकर रातों रात मालामाल होने के इस खेल में नेता से लेकर, कलेक्ट्रेट कार्यालय, नगर पालिका, अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय, पटवारी, आरआई और अन्य वरिष्ठ अधिकारी सभी मिलकर अवैध काम को संरक्षण देकर बढ़ावा दे रहे हैं।