121 सरोवरों की सूची छिपाने में जुटा आरईएस
विदिशा। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी “अमृत सरोवर योजना” में विदिशा जिले में भारी गड़बड़ियों की आशंका गहराती जा रही है।
RTI के तहत मांगी गई 121 अमृत सरोवरों की सूची देने से ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) विभाग ने साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, मामले में जिला पंचायत विदिशा के प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं सीईओ द्वारा पारित आदेश ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के मुताबिक अमृत सरोवरों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, जिसमें जिले के 121 सरोवरों की सूची और संबंधित रिकॉर्ड की मांग की गई थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी RES ने जवाब देते हुए जानकारी “कार्यालय से संबंधित नहीं” बताकर पल्ला झाड़ लिया।
चौंकाने वाली बात यह है कि प्रथम अपील में भी जिला पंचायत सीईओ ने बिना ठोस जांच किए लोक सूचना अधिकारी के जवाब को सही ठहराते हुए प्रकरण निराकृत कर दिया। आदेश में यह तक कहा गया कि जानकारी कार्यालय में संधारित नहीं है, इसलिए उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अमृत सरोवर योजना सरकारी रिकॉर्ड और करोड़ों रुपये के खर्च से जुड़ी है, तो आखिर 121 सरोवरों की सूची गायब कैसे हो गई? क्या विभाग जानबूझकर जानकारी छिपा रहा है? क्या अमृत सरोवरों के नाम पर हुए कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है?
जानकारों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड ही उपलब्ध नहीं है, तो योजनाओं की मॉनिटरिंग और भुगतान किस आधार पर हुए। RTI में जानकारी न देना और अपील में भी राहत न मिलना पूरे मामले को और संदिग्ध बना रहा है।
मामले को लेकर अब जिले में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पारदर्शिता की बात करने वाले अधिकारी ही यदि सूचना छिपाने लगें, तो भ्रष्टाचार पर सवाल उठना स्वाभाविक है।