विदिशा, एमपी धमाका
विदिशा जिले के आयुष विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठे गंभीर सवालों के बीच आखिरकार करीब 9 माह बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर को सौंपे गए विस्तृत शिकायत पत्र पर संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन ने जिला आयुष अधिकारी से 11 बिंदुओं पर सात दिवस के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
कलेक्टर कार्यालय से जारी पत्र में जिला सतर्कता अधिकारी ने शिकायत पत्र का परीक्षण कर संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके। शिकायत में आयुष विभाग पर केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार में अनियमितता, रस्म अदायगी चिकित्सा शिविर, झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की कमी और विभागीय लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आयुष विभाग में सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के मरीजों को योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। आयुष अस्पतालों में चिकित्सकों और स्टाफ को वेतन व सुविधाएं दिए जाने के बाद भी मरीजों की संख्या कम होना विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिले के 14 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर हर माह चिकित्सा शिविर लगाए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन कई स्थानों पर इन शिविरों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक नहीं पहुंच रहा। शिविरों के नाम पर होने वाले खर्च और प्रचार-प्रसार की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई है।
शिकायत में सूचना के अधिकार अधिनियम के पालन पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई आयुष केंद्रों पर लोक सूचना अधिकारी तक नियुक्त नहीं हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। इसके अलावा झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, आयुष चिकित्सकों की ड्यूटी और उपस्थिति की जांच कराने तथा विभागीय गतिविधियों की सख्त निगरानी की मांग भी की गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि विभाग प्रचार-प्रसार के नाम पर सरकारी योजनाओं का दिखावटी क्रियान्वयन कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर आम मरीजों को पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा। शिकायत में यह भी कहा गया कि कई मामलों में विभाग पत्रकारों पर दबाव बनाने और सवाल उठाने वालों को नजरअंदाज करने का प्रयास करता रहा है।
अब जिला प्रशासन द्वारा जिला आयुष अधिकारी से स्पष्टीकरण तलब किए जाने के बाद विभाग में हलचल तेज हो गई है। लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन जांच के बाद क्या कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में आयुष सेवाओं में सुधार दिखाई देगा या मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।