एमपी धमाका
विदिशा। शहर की पेयजल व्यवस्था को अधिक सुचारु, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए जल प्रदाय विभाग में स्थायी तकनीकी अमले की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जानकारों और नागरिकों का मानना है कि शहर की बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए कम से कम दो सहायक यंत्री (एई) एवं चार सब इंजीनियरों की स्थायी नियुक्ति की जानी चाहिए।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में फिल्टर प्लांट संचालन और शहर की जल सप्लाई व्यवस्था का कार्य सीमित संसाधनों और कम स्टाफ के कारण प्रभावित होता है। यदि अलग-अलग अधिकारियों को फिल्टर प्लांट एवं शहर की जल वितरण व्यवस्था की जिम्मेदारी दी जाए तो मॉनिटरिंग बेहतर होगी और समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक टीम फिल्टर प्लांट की तकनीकी निगरानी, जल शोधन और मशीनों के रखरखाव पर ध्यान दे, जबकि दूसरी टीम शहर में पाइपलाइन, सप्लाई, लीकेज एवं वितरण व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करे। इससे जल संकट, कम प्रेशर और सप्लाई बाधित होने जैसी समस्याओं में काफी कमी आएगी।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल प्रदाय व्यवस्था के लिए स्थायी तकनीकी ढांचा तैयार किया जाए, ताकि लोगों को नियमित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।