विदिशा, एमपी धमाका
सामान्य वन मंडल विदिशा द्वारा आम लोगों को जंगलों में पाए जाने वाले पशु-पक्षियों, वन्य जीवों और प्रकृति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देने के उद्देश्य से शहर के माधव उद्यान में कई सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन बोर्डों पर विदिशा वन क्षेत्र में पाए जाने वाले प्रमुख पक्षियों, जीव-जंतुओं तथा दीमक की बांबी जैसी प्राकृतिक संरचनाओं के अलावा राष्ट्रीय एवं राज्य पक्षी, भारत का सबसे बड़ा एवं छोटा पक्षी, बया पक्षी के घोसला निर्माण की प्रक्रिया, मकड़ी के जाले, प्रकृति का ताना-बाना, जंगल के गायक, प्रकृति के उड़ने वाले रत्न, पक्षियों का निड़न की रोचक जानकारी दी गई है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि वन विभाग ने ये बोर्ड ऐसी जगह पर लगा दिए हैं, जहां आम लोगों की नजर ही नहीं पहुंचती। उद्यान के किनारे पर झाड़ियों के बीच लगे इन बोर्डों तक न तो आसानी से लोग पहुंच पाते हैं और न ही इन पर लिखी जानकारी पढ़ पाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन बोर्डों को उद्यान के मुख्य मार्ग, प्रवेश द्वार या लोगों की आवाजाही वाले स्थानों पर लगाया जाता तो बच्चों, विद्यार्थियों और पर्यटकों को वन्य जीवों की उपयोगी जानकारी मिल सकती थी।
वन विभाग द्वारा हजारों रुपए खर्च कर लगाए गए इन सूचना बोर्डों का उद्देश्य फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है। लोगों का कहना है कि “जंगल में मोर नाचा किसने देखा” वाली कहावत इन बोर्डों पर पूरी तरह फिट बैठती है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब आम जनता तक जानकारी पहुंचानी ही थी, तो बोर्ड ऐसी जगह क्यों लगाए गए जहां उन पर किसी की नजर ही नहीं पड़ती?