गरीबों के निवाले में लापरवाही या भ्रष्टाचार?
टीकमगढ़, एमपी धमाका
टीकमगढ़ में पीडीएस वितरण के दौरान गेहूं की बोरी से जानवर की हड्डियां मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह गेहूं विदिशा जिले के वेयरहाउस से सप्लाई होकर टीकमगढ़ पहुंचा था।
जैसे ही हितग्राहियों ने गेहूं की पहली बोरी खोली, उसमें जानवर की हड्डियां दिखाई दीं। इसके बाद लोगों ने राशन लेने से इनकार कर दिया और मामले की सूचना अधिकारियों को दी गई। प्रशासन ने तत्काल दुकान को सील कर जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार करीब 163 क्विंटल गेहूं विदिशा के वेयरहाउस से टीकमगढ़ भेजा गया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भंडारण और परिवहन की प्रक्रिया के दौरान गुणवत्ता की निगरानी कैसे की गई? यदि गरीबों तक पहुंचने वाले राशन में इस तरह की सामग्री मिल रही है, तो खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होना स्वाभाविक है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
क्या वेयरहाउस स्तर पर गुणवत्ता जांच में लापरवाही हुई?
सप्लाई से पहले गेहूं की जांच किसने की?
जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या अन्य जिलों में भेजे गए स्टॉक की भी जांच होगी?
जनता जानना चाहती है जवाब
गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए भेजे जाने वाले राशन में इस तरह की गंभीर लापरवाही न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला भी है। अब निगाहें जांच रिपोर्ट और जिम्मेदारों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।
विदिशा से सप्लाई हुए गेहूं में हड्डियां मिलने का मामला प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की सच्चाई को सामने ला रहा है।