राशन, मनरेगा, आवास, पेंशन और उपचार सहायता में पारदर्शिता के लिए ऐसे करें सूचना के अधिकार का सदुपयोग
एमपी धमाका
विदिशा। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों के लिए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और अपने अधिकारों की रक्षा करने का बेहद प्रभावी कानूनी माध्यम है। सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो RTI केवल सूचना हासिल करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि राशन, रोजगार, आवास, पेंशन, उपचार और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में सरकारी रिकॉर्ड को सामने लाकर हक की लड़ाई को मजबूत करने का हथियार बन सकता है।
BPL आवेदकों को शुल्क में छूट
RTI अधिनियम की धारा 7(5) के तहत गरीबी रेखा से नीचे (BPL) श्रेणी के आवेदकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित शुल्क से छूट का प्रावधान है। आवेदन के साथ वैध BPL कार्ड अथवा संबंधित प्रमाण संलग्न करना आवश्यक होता है। इससे जरूरतमंद व्यक्ति बिना आर्थिक बोझ के सरकारी अभिलेख हासिल कर सकता है।
राशन में गड़बड़ी है तो मांगें रिकॉर्ड
उचित मूल्य दुकान से संबंधित मामलों में स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, मासिक आवंटन आदेश सहित उपलब्ध संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी जा सकती हैं। राशन कार्ड बनाने, नाम जोड़ने या हटाने के लंबित मामलों में कार्रवाई से संबंधित उपलब्ध नोटशीट, आदेश और पत्राचार की प्रतियां भी मांगी जा सकती हैं।
मनरेगा में मजदूरी और हाजिरी की पड़ताल
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) में काम करने वाले मजदूर अपने जॉब कार्ड, मस्टर रोल, दर्ज हाजिरी और मजदूरी भुगतान से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांग सकते हैं। इससे सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज काम और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर की पड़ताल की जा सकती है।
प्रधानमंत्री आवास में सूची से लेकर सत्यापन तक
प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य आवास योजनाओं में स्वीकृत लाभार्थियों की सूची, प्रतीक्षा सूची, ग्राम सभा के अनुमोदन प्रस्ताव तथा पात्रता जांच से संबंधित उपलब्ध अभिलेख मांगे जा सकते हैं। किसी लाभार्थी के चयन अथवा अपात्र व्यक्ति के चयन पर सवाल हो तो संबंधित चयन, सत्यापन और निर्णय से जुड़े रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं।
इलाज और सहायता राशि का भी रिकॉर्ड
स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक एवं वितरण से संबंधित अभिलेख, सहायता राशि की स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति आदेश और संबंधित रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियां मांगी जा सकती हैं। आयुष्मान भारत, राहत कोष अथवा अन्य सरकारी सहायता से जुड़े मामलों में भी उपलब्ध अभिलेख RTI के माध्यम से हासिल किए जा सकते हैं।
पेंशन अटकी है तो दस्तावेज मांगें
वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के मामलों में आवेदन, पात्रता जांच, जांच प्रतिवेदन, स्वीकृति आदेश, भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड तथा भुगतान नहीं होने से जुड़े उपलब्ध आधिकारिक पत्राचार की प्रतियां मांगी जा सकती हैं।
सवाल नहीं, अभिलेख मांगना ज्यादा प्रभावी
RTI आवेदन तैयार करते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रश्न पूछने के बजाय उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड मांगा जाए। मसलन, केवल यह पूछने के बजाय कि “मेरा काम क्यों नहीं हुआ?” संबंधित फाइल की नोटशीट, आदेश, जांच रिपोर्ट और पत्राचार की प्रमाणित प्रतियां मांगना अधिक प्रभावी हो सकता है।
दस्तावेज, पंजिका, रजिस्टर, आदेश, रिपोर्ट, नोटशीट और अन्य उपलब्ध अभिलेखों की स्पष्ट पहचान कर सूचना मांगी जानी चाहिए।
ज्यादा रिकॉर्ड हो तो निरीक्षण का विकल्प
RTI अधिनियम की धारा 2(j) के तहत अभिलेखों के निरीक्षण का अधिकार भी महत्वपूर्ण है। यदि रिकॉर्ड बहुत अधिक हो तो आवेदक संबंधित फाइलों, रजिस्टरों अथवा अभिलेखों का निरीक्षण कर आवश्यक पृष्ठों की प्रतियां मांग सकता है। इससे अनावश्यक दस्तावेजों की बड़ी संख्या के बजाय सीधे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड चिन्हित किए जा सकते हैं।
जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में 48 घंटे
यदि मांगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित है तो RTI अधिनियम की धारा 7(1) के तहत सूचना 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान है। ऐसे मामलों में आवेदन में जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े आपात आधार को स्पष्ट रूप से दर्ज करना चाहिए।
RTI को ऐसे बनाएं मजबूत
आवेदन संबंधित विभाग के लोक सूचना अधिकारी (PIO) को संबोधित किया जाना चाहिए। विषय में योजना, अवधि, ग्राम/वार्ड और संबंधित रिकॉर्ड का स्पष्ट उल्लेख करें। उदाहरण के लिए—“वित्तीय वर्ष ___ में ग्राम ___ के प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अनुमोदित लाभार्थियों की अंतिम सूची एवं ग्राम सभा के अनुमोदन प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति।”
इसी तरह उचित मूल्य दुकान के लिए माह और वर्ष का उल्लेख करते हुए दैनिक वितरण रजिस्टर तथा मासिक आवंटन आदेश की प्रमाणित प्रतियां मांगी जा सकती हैं।
BPL आवेदक अपने आवेदन में यह भी लिख सकता है कि वह गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता है और संबंधित प्रमाण संलग्न है, इसलिए नियमानुसार सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
सरकारी कागज ही बन सकते हैं सबसे बड़ा सबूत
गरीब और वंचित व्यक्ति के लिए RTI का सबसे प्रभावी इस्तेमाल केवल जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज तथ्यों को सामने लाना है। राशन, मनरेगा, आवास, पेंशन, इलाज अथवा अन्य योजनाओं में अनियमितता का संदेह हो तो उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज जुटाकर उन्हें संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष शिकायत, अपील अथवा आवश्यक कानूनी कार्रवाई में साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यानी सही सवाल पूछने से ज्यादा जरूरी है—सही सरकारी कागज मांगना। यही RTI को गरीब और वंचित व्यक्ति के हक की लड़ाई का मजबूत हथियार बनाता है।